मेरा ध्यान ही नहीं लगता...मैं पूजा पाठ करने लग जाऊ तो बैठ नहीं पाता...क्यों हो रहा ऐसा...पूजा पाठ करूं तो सब बुरा होने लगता है...
और ये सब सवाल आ जाए दिमाग में तो इनका सॉल्यूशन ढूंढने सोशल मीडिया और गूगल पे पढ़ने लग जाओगे वीडियो देखने लग जाओगे।
और ये सिर्फ पूजा पाठ, अध्यात्म या साधना के क्षेत्र में नहीं हर चीज में है...
शादी नहीं टिक रही, नौकरी में मन नहीं लग रहा, पढ़ाई नहीं हो पा रही, करियर बेकार जा रहा...
क्या किसीने टोना टोटका कर दिया? अजी घंटा...
पूजा पाठ करना है पर क्यों?
ध्यान करना है पर क्यों?
अध्यात्म में सफलता चाहिए पर क्यों?
शादी करनी है पर क्यों?
जॉब करनी है पर क्यों?
करियर करना है पर क्यों?
किसीके देखा देखी या पूरी दुनिया कर रही है या ट्रेंड है इसलिए करोगे तो एक न एक दिन मुंह की खानी ही पड़ेगी...
ये जो छोटासा 'क्यों' है, इसके बहुत मायने है अगर गहन चिंतन करोगे तो क्या कर रहे हो, कैसे कर रहे हो और क्यों कर रहे हो इन सबका जवाब खुद से पूछोगे तो आधी लाइफ के प्रॉब्लम खुद ही सॉल्व हो जायेंगे...
माया उसको छल नहीं सकती जिसका "क्यों" clear है, और उसको छोड़ेगी नहीं जिसके पास इस "क्यों" के हजारों जवाब है।
बाकी तो सब बकवास है।
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मेरा ध्यान ही नहीं लगता
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